Skip to main content

वीरू देवगन: स्टंट की दुनिया के जानेमाने नाम नहीं रहे

बॉलिवुड अभिनेता अजय देवगन के पिता और स्टंट मास्टर वीरू देवगन का मुंबई में निधन हो गया है. वीरू देवगन एक जानेमाने एक्शन निर्देशक थे और उन्होंने कई सुपरहिट फ़िल्मों में स्टंट कोरियोग्राफ़ किये थे.
77 साल के वीरू देवगन ने 27 मई को मुंबई में अंतिम सांस लीं. वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उनकी मौत की ख़बर सामने आते ही सोशल मीडिया पर फ़िल्म जगत से जुड़े लोग अपना शोक व्यक्त करने लगे.
वीरू देवगन अस्सी के दशक में एक्शन और स्टंट की दुनिया के प्रसिद्ध नाम थे. वो दौर एंग्री यंग मैन और एक्शन फ़िल्मों का था जिनमें वीरू देवगन ने कई एक्शन दृश्यों का निर्देशन किया. उन्हेंने क़रीब 150 से ज़्यादा फ़िल्मों में एक्शन और फाइट सीन कोरियोग्राफ़ किए थे.
वह एक्शन निर्देशन के साथ-साथ फ़िल्म निर्देशन भी कर चुके हैं. उन्होंने 1999 में आई फ़िल्म 'हिंदूस्तान की क़सम' बनाई थी.
अमृतसर में जन्में वीरू देवगन 14 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई में क़िस्मत आज़माने चले आए थे. वो ख़ुद हीरो बनना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने काफ़ी संघर्ष किया और मुंबई में रहने के लिए अलग-अलग काम भी किये.
लेकिन, जब उन्हें अभिनय में सफलता नहीं मिली तो उन्होंने एक्शन निर्देशन पर काम करना शुरू कर दिया. उन्होंने लाल बादशाह, इश्क़, इंकार, मिस्टर नटवरलाल, क्रांति, हिम्मतवाला, शहंशाह, त्रिदेव, बाप नंबरी बेटा दस नंबरी, फूल और कांटे, आज का अर्जुन, क़यामत और ख़ून भरी मांग जैसी फ़िल्मों में एक्शन दृश्यों का निर्देशन किया.
अजय देवगन की 'फूल और कांटे' फ़िल्म में दो बाइक पर सवार होने वाल एक्शन सीन काफ़ी लोकप्रिय भी हुआ था.
लेकिन, हीरो बनने की चाह अब भी उनके दिल में बाक़ी थी तो उन्होंने अपने बड़े बेटे अजय देवगन को हीरो बनाने का फ़ैसला लिया.
हालांकि, अजय देवगन ने सोनी टीवी के एक शो 'कपिल शर्मा शो' में बताया था कि वह कभी अभिनय में नहीं आना चाहते थे. उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर करियर की शुरुआत की थी. पर पिता का मानना था कि अजय को अभिनेता बनना चाहिए और उन्हीं के कहने पर अजय देवगन ने इस बारे में सोचना शुरू किया था.
कुछ पिता की ख्वाहिश, तो कुछ अजय देवगन की मेहनत और वो फ़िल्मी दुनिया के सुपरस्टार बन गए. हालांकि, वीरू देवगन ने ख़ुद भी सौरभ, क्रांति और सिंघासन जैसी फ़िल्मों में अभिनय किया था.
वीरू देवगन के दो बेटे अजय व अनिल देवगन और दो बेटियां हैं. उनकी पत्नी का नाम वीणा देवगन है.
वीरू देवगन की अंतिम यात्रा में शामिल होने शाहरुख़ ख़ान, एशवर्या राय, अभिषेक बच्चन, संजय दत्त, महेश भट्ट और साजिद ख़ान समेत कई फ़िल्मी सितारे पहुंचे.
साथ ही सोशल मीडिया पर भी उनके निधन पर शोक ज़ाहिर किया गया. अभिनेता अुनपम खेर ने ट्वीट किया, ''वीरू देवगन जी के निधन की ख़बर सुनकर बेहद दुखी हूं. उनके साथ कई फ़िल्मों में काम किया. वो एक महान एक्शन निर्देशक थे.''
अभिनेता अक्षय कुमार ने ट्विटर पर लिखा है, ''वीरू देवगन के निधन के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ. फ़िल्म जगत के बेहतरीन एक्शन निर्देशकों में से एक थे.''
फ़िल्म निर्माता महेश भट्ट ने ट्वीट किया है, ''वीरू देवगन और मैंने 70 के दशक में एकसाथ करियर शुरू किया था. मुझे याद है कि अजय देवगन की पहली फ़िल्म रिलीज़ होने पर उन्होंने मुझसे कहा था, 'अजय को एक महान अभिनेता बनाना'. आख़िरकार अजय और मैंने जख़्म फ़िल्म में एकसाथ काम किया जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का पहला नेशनल अवॉर्ड मिला.''
फ़िल्म अभिनेता राज बब्बर ने लिखा है, ''वीरू देवगन को खोना एक निजी नुक़सान है. मुझे याद है कि मैंने अमीरी ग़रीबी और इतिहास आदि फ़िल्मों में उनके साथ काम किया था.''
सोशल मीडिया वीरू देवगन की पुरानी तस्वीरों व पुरानी फ़िल्मों के पोस्टर्स से भर गया है और लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. वीरू देवगन इमोर्टल मेमोरीज़ अवॉर्ड और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजे जा चुके हैं.

Comments

Popular posts from this blog

ध्यानचंद का भारत रत्न कैसे 'गोल' कर गईं सरकारें

अपने जीवन काल में ही एक मिथकीय हीरो बन चुके हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को मरणो परांत देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न ' दिए जाने की मांग और चर्चा अक्सर होती रही है लेकिन यह जानना दिलचस्प होगा कि उन्हें यह सम्मान क्यों और कैसे नहीं मिला? आज मेजर ध्यानचंद की 40वीं पुण्यतिथि है. 2014 में मेजर ध्यानचंद के नाम की सिफ़ारिश को ठुकराते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार ने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को 'भारत रत्न' दे दिया था. आरटीआई से मिली जानकारियों के मुताबिक 2013 में मेजर ध्यानचंद का बायोडेटा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय में कई महीने पहले ही पहुंच चुका था. उस पर पीएम की स्वीकृति भी मिल चुकी थी लेकिन बाद में अचानक सचिन के नाम पर मुहर लगा दी गई. 11 अप्रैल 2011 को भाजपा सांसद मधुसूदन यादव ने केंद्र सरकार से सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने के लिए नियमों में बदलाव का आग्रह किया था. तब तक यह सम्मान साहित्य, कला, विज्ञान और जनसेवा के क्षेत्र में दिया जाता थ ा, खिलाड़ियों के लिए भारत का शीर्ष सम्मान अर्जुन अवार्ड है. इसके बाद सरकार ने भारत रत्न सम्मान के निय...

كيف جلب "السيف العربي" الثروة والازدهار لشركة بريطانية؟

يقول غرانت مكدونالد، صاحب ورشة لصياغة الفضة في لندن ، إنه كاد "يطير فرحا" عند خروجه من أحد القصور الملكية في الشرق الأوسط. ففي هذه الزيار ة، عقد صفقة من شأنها إحداث نقلة في حجم أعماله. ورغم مرور حوالي 4 0 عاما على هذه اللحظة، إلا أنه ما زال يستعيد كل تفصيل فيها بقوة. وقال مكدونالد، البالغ من العمر 71 عاما، إنه "كان شعورا رائعا. ومجرد سرد الحكاية الآن يمنحني شعورا كبيرا بالإنجاز، بالضبط كما شعرت في ثمانينيات القرن العشرين". أسس مكدونالد ورشة المصوغات الفضية التي يملكها في ستينيات القرن العشرين، لكن ال أزمة التي مر بها الاقتصاد البريطانين في السبعينيات دفعته للبحث عن أسواق خارج البلاد. وبالفعل، تمكن من الحصول على بعض التعاقدات الصغيرة عام 1979 في إحدى دول الخليج العربي، التي رفض ذكرها لأسباب تتعلق بالخصوصية. وبعد عامين، أثناء إحدى زياراته لهذه الدولة، سُئل مكدونالد ما إذا كان على استعداد لتصنيع أقيم هدية تقدمها العائلة المالكة لكبار ضيوفها، وهو السيف الشرفي. ووافق مكدونالد على العرض، وتحدث عن جماليات السيف م ن باب التأدب، لكنه لم يكن منبهرا بصنعة السيف...

आम आदमी पार्टी क्या राष्ट्रीय राजनीति में हाशिए पर सिमट रही है?

आम आदमी पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में 40 सीटों पर लड़ी, मगर उ से कामयाबी सिर्फ़ एक सीट पर मिली. यही नहीं, दिल्ली में जहाँ कि उसी की पार्टी की सरकार है, वहाँ भी पार्टी को सीभी सात सीटों पर हार का मुँह देखना पड़ा. इसके साथ ही वोट प्रतिश त के लिहाज़ से भी ये पार्टी बीजेपी और कांग्रेस के बाद तीसरे नं बर पर पहुंच गई है. जबकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इसी पार्टी को पंजाब की चार सीटों पर जीत हासिल हुई थी. लोकसभा चुनाव में इतने खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के अंदर और बाहर सभी ओ र से पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं. चांदनी चौक की विधायक अलका लांबा ने 23 मई को चुनावी नतीजे सामने आने के बाद पार्टी छो ड़ने का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही कई पूर्व सहयोगियों ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक आम आदमी पार्टी के ख़रा ब प्रदर्शन के लिए अरविंद केजरीवाल को ज़िम्मेदार ठहराया है. ऐसे में सवाल उठता है कि साल 2020 में दिल्ली विधानसभा औ र 2022 में पंजाब विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए कैसी चुनौतियां सामने आएंगी वरिष्ठ पत्रकार सरबजीत पंधेर मानते हैं कि पंजाब में मतदाताओं के मोह...