आम आदमी पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में 40 सीटों पर लड़ी, मगर उ से कामयाबी सिर्फ़ एक सीट पर मिली. यही नहीं, दिल्ली में जहाँ कि उसी की पार्टी की सरकार है, वहाँ भी पार्टी को सीभी सात सीटों पर हार का मुँह देखना पड़ा. इसके साथ ही वोट प्रतिश त के लिहाज़ से भी ये पार्टी बीजेपी और कांग्रेस के बाद तीसरे नं बर पर पहुंच गई है. जबकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इसी पार्टी को पंजाब की चार सीटों पर जीत हासिल हुई थी. लोकसभा चुनाव में इतने खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के अंदर और बाहर सभी ओ र से पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं. चांदनी चौक की विधायक अलका लांबा ने 23 मई को चुनावी नतीजे सामने आने के बाद पार्टी छो ड़ने का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही कई पूर्व सहयोगियों ने पंजाब से लेकर दिल्ली तक आम आदमी पार्टी के ख़रा ब प्रदर्शन के लिए अरविंद केजरीवाल को ज़िम्मेदार ठहराया है. ऐसे में सवाल उठता है कि साल 2020 में दिल्ली विधानसभा औ र 2022 में पंजाब विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए कैसी चुनौतियां सामने आएंगी वरिष्ठ पत्रकार सरबजीत पंधेर मानते हैं कि पंजाब में मतदाताओं के मोह...